Shubhanshu Shukla Biography-ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (जन्म: 10 अक्टूबर 1985) भारतीय वायुसेना के एक टेस्ट पायलट और अंतरिक्ष यात्री हैं। वे भारत के पहले ऐसे शख्स हैं जो 26 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचे। इस तरह वो भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बने पहले थे राकेश शर्मा, जो 1984 में गए थे। यानी शुभांशु ने ये बड़ी उपलब्धि 41 साल बाद हासिल की। उन्होंने ये सफर Axiom-4 मिशन के तहत किया और अब वो 14 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर कई वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। शुभांशु को ISRO के गगनयान मिशन (जो 2027 में होगा) के लिए भी चुना गया है।
शुभांशु शुक्ला बायोडाटा (Shubhanshu Shukla Biodata)
| पूरा नाम | शुभांशु शुक्ला |
| जन्म | 10 अक्टूबर 1985 |
| उम्र | 39 वर्ष (2025 तक) |
| पेशा | भारतीय वायुसेना ग्रुप कैप्टन, टेस्ट पायलट, अंतरिक्ष यात्री |
| जानी जाती हैं | एक्सिओम-4 मिशन, गगनयान मिशन, पहला भारतीय ISS पर |
| होमटाउन | लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत |
| धर्म | हिंदू |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| राशि | तुला |
शुभांशु शुक्ला फिजिकल डिटेल्स
| लंबाई | लगभग 5’8” (173 सेमी) |
| वजन | लगभग 70 किलो |
| आंखों का रंग | काला |
| बालों का रंग | काला |

शुरुआती जीवन
शुभांशु शुक्ला का जन्म लखनऊ, उत्तर प्रदेश के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन से ही वो शांत स्वभाव के, अनुशासित और पढ़ाई में बहुत अच्छे थे। स्कूल में हमेशा अच्छे नंबर लाते थे और खेलों में भी हिस्सा लेते थे, लेकिन ज़्यादातर स्कूल तक ही सीमित रहते थे। उनके माता-पिता, शंभू दयाल शुक्ला और आशा शुक्ला, बताते हैं कि शुभांशु कभी झगड़ों या किसी तरह की शिकायतों में नहीं पड़ते थे। उनका पालन-पोषण काफी साधारण तरीके से हुआ, जिसने उन्हें हमेशा जमीन से जुड़े रखा।
जब वो 16 साल के थे, तो उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) का फॉर्म भर दिया — ये बस एक संयोग था क्योंकि शुरुआत में उन्हें सेना में करियर बनाने में खास दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन जब उनका NDA में चयन हो गया, तो उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी। फिर उन्होंने ठान लिया कि जो भी करेंगे, उसमें सबसे अच्छा करेंगे और हर जगह शानदार प्रदर्शन किया।
शुभांशु शुक्ला शिक्षा
शुभांशु ने लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से पढ़ाई की, जहां वो हमेशा टॉप करते थे। इसके बाद उन्होंने NDA में ट्रेनिंग ली और 17 जून 2006 को उन्हें भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनाया गया। बाद में उन्होंने बेंगलुरु की इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) से और भी एडवांस ट्रेनिंग ली, जो उन्हें टेस्ट पायलट और अंतरिक्ष यात्री बनने में बहुत काम आई।
| स्कूल | सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, लखनऊ |
| कॉलेज/विश्वविद्यालय | राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला, पुणे; भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु |
| योग्यता | NDA से स्नातक; IISc से उन्नत प्रशिक्षण |
शुभांशु शुक्ला फैमिली डिटेल्स
शुभांशु का परिवार लखनऊ में रहता है और उन्हें उनकी कामयाबी पर बहुत गर्व है। उनकी पत्नी कामना एक डेंटिस्ट हैं और उनका एक छोटा बेटा है, सिद्ध। जब शुभांशु अंतरिक्ष मिशन पर गए थे, तब घरवालों ने खूब दुआएं कीं और पूजा-पाठ किया। उनकी सफलता को पूरे देश की शान माना गया।
| पिता | शंभू दयाल शुक्ला |
| माता | आशा शुक्ला |
| भाई-बहन | जानकारी उपलब्ध नहीं |
| पत्नी | कामना शुक्ला (दंत चिकित्सक) |
| बच्चे | सिद्ध (पुत्र) |
| निवास | लखनऊ, उत्तर प्रदेश |
शुभांशु शुक्ला के बारे में खास बातें
- ऐतिहासिक उपलब्धि– 26 जून 2025 को शुभांशु पहले भारतीय बने, जिन्होंने ISS में प्रवेश किया, और वे दुनिया के 634वें अंतरिक्ष यात्री हैं।
- भारतीय संस्कृति का प्रचार-अंतरिक्ष में भारतीय व्यंजन जैसे गाजर का हलवा और मूंग दाल का हलवा ले गए, साथ ही योग को बढ़ावा देने की योजना बनाई, विशेष रूप से 21 जून (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस) पर।
- कॉन्फिडेंट और शांत स्वभाव-हमेशा शांत और नियंत्रित रहते हैं, चाहे कितनी भी मुश्किल स्थिति हो। वे परिवार को फोन पर आश्वस्त करते हैं कि “सब नॉर्मल है, मैं वापस आऊंगा।
- गगनयान मिशन-2019 में ISRO के गगनयान मिशन के लिए चुने गए, और 2027 में इसके कमांडर-इन-वेटिंग हैं।
- प्रकृति प्रेमी-फिटनेस और योग में रुचि रखते हैं, और अंतरिक्ष में भी योग करने की योजना बनाई है।
- प्रेरणा स्रोत-उनके स्कूल, सिटी मॉन्टेसरी, लखनऊ में उनकी मां ने लॉन्च देखा, और पूरे शहर ने उत्सव मनाया।

उपलब्धियां और पुरस्कार
- अंतरिक्ष यात्री नंबर 634: 26 जून 2025 को ISS में प्रवेश करने पर NASA ने उन्हें अंतरिक्ष यात्री बैज प्रदान किया।
- गगनयान प्रशिक्षण: 27 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल।
- वायुसेना में उत्कृष्टता: NDA और वायुसेना में हमेशा टॉप रैंक, टेस्ट पायलट के रूप में शानदार प्रदर्शन।
- राष्ट्रीय गौरव: भारत के लिए 41 साल बाद अंतरिक्ष में मानव मिशन की शुरुआत, राकेश शर्मा के बाद दूसरा भारतीय अंतरिक्ष यात्री।
करियर हाइलाइट्स
शुभांशु ने अपने करियर की शुरुआत 17 जून 2006 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट (लड़ाकू विमान उड़ाने वाले पायलट) के तौर पर की थी। अपनी मेहनत और लगन की वजह से वो हमेशा सबसे आगे रहे। बाद में वो एक टेस्ट पायलट बने और कई अहम उड़ानों का हिस्सा रहे।
साल 2019 में उन्हें ISRO के गगनयान मिशन के लिए चुना गया। इसके लिए उन्होंने NASA और Axiom Space जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ ट्रेनिंग ली।
26 जून 2025 को शुभांशु ने Axiom-4 मिशन के तहत SpaceX के Falcon 9 रॉकेट और Crew Dragon Grace कैप्सूल से अंतरिक्ष की यात्रा शुरू की। करीब 28 घंटे बाद वो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के हार्मनी मॉड्यूल में पहुंचे।
इस मिशन में शुभांशु पायलट की भूमिका निभा रहे हैं और कुल 60 वैज्ञानिक प्रयोगों में से 7 को खुद लीड कर रहे हैं। इनमें से कई प्रयोग खाने और अंतरिक्ष में पोषण से जुड़े हैं।
ISS पहुंचने के बाद उन्होंने अपना पहला संदेश हिंदी में भेजा: आपके प्यार और आशीर्वाद से मैं ISS पहुंच गया हूं।

शुभांशु शुक्ला करियर की शुरुआत
| वायुसेना में कमीशन | 17 जून 2006 – फाइटर पायलट |
| टेस्ट पायलट करियर | भारतीय वायुसेना में टेस्ट पायलट के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन |
| अंतरिक्ष डेब्यू | 26 जून 2025 – एक्सिओम-4 मिशन, ISS |
| गगनयान मिशन | 2019 में चयन, 2027 में कमांडर-इन-वेटिंग |
शुभांशु शुक्ला नेट वर्थ और इनकम
शुभांशु की कमाई ज़्यादातर वायुसेना में उनकी नौकरी और ISRO के अंतरिक्ष मिशनों से होती है। उनकी कुल कमाई का अंदाज़ा भी इन्हीं कामों को देखकर लगाया जाता है।
| अनुमानित नेट वर्थ | 5-10 करोड़ रुपये (2025 तक) |
| इनकम सोर्स | भारतीय वायुसेना, ISRO मिशन, अंतरिक्ष प्रशिक्षण |
शुभांशु शुक्ला विवाद और चुनौतियां
शुभांशु ने अपने करियर में कोई बड़ा विवाद नहीं झेला। उनकी सबसे बड़ी चुनौती अंतरिक्ष यात्रा की कठिनाइयों, जैसे माइक्रोग्रैविटी में अनुकूलन, थी। उन्होंने अपने पहले संदेश में बताया कि उनका सिर थोड़ा भारी महसूस हुआ, लेकिन यह उत्साह की तुलना में मामूली था।
शुभांशु सोशल मीडिया
| gagan.shux |
शुभांशु शुक्ला सामाजिक योगदान
शुभांशु ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर बढ़ावा दिया, खासकर अंतरिक्ष में भारतीय व्यंजन और योग को ले जाकर। उनकी यह पहल भारत की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने लाने में महत्वपूर्ण रही। वे युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, खासकर लखनऊ और उत्तर प्रदेश में, जहां उनकी उपलब्धियों को स्कूलों और समुदायों में उत्सव के रूप में मनाया गया।
शुभांशु शुक्ला लाइफस्टाइल और फेवरेट्स
| फेवरेट खाना | गाजर का हलवा, मूंग दाल का हलवा |
| फेवरेट गतिविधि | योग, फिटनेस, वैज्ञानिक अनुसंधान |
| फेवरेट डेस्टिनेशन | जानकारी उपलब्ध नहीं |
| हॉबी | खेलकूद, पढ़ाई, तकनीकी अनुसंधान |
शुभांशु फिटनेस के शौकीन हैं और रोज़ योग भी करते हैं। उनकी सादी और अनुशासित ज़िंदगी को उनके घरवाले और साथ काम करने वाले लोग बहुत पसंद करते हैं।




