Raushan Anand Sir Biography: रौशन आनंद एक शिक्षक, मोटिवेशनल स्पीकर और बिहार के पटना में ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के फाउंडर हैं। उनका जन्म बिहार के सहरसा जिले के धमसेना गांव में हुआ था। रौशन ने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, जैसे कि आर्थिक तंगी, पारिवारिक असहमति, और बार-बार असफलताएं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनकी अकादमी बिहार में “दरोगा फैक्ट्री” के नाम से मशहूर है, जिसने हजारों स्टूडेंट्स को बिहार पुलिस और अन्य सरकारी नौकरियों में सफलता दिलाई है।
रौशन आनंद जीवनी (Raushan Anand Sir Bio/Wiki)
| पूरा नाम | रौशन आनंद |
| जन्म | धमसेना गांव, सहरसा, बिहार (तारीख उपलब्ध नहीं) |
| उम्र | लगभग 30-35 वर्ष (2025 तक, अनुमानित) |
| पेशा | शिक्षक, मोटिवेशनल स्पीकर, कोचिंग डायरेक्टर |
| जानी जाते हैं | ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी, बिहार पुलिस कोचिंग |
| होमटाउन | धमसेना, सहरसा, बिहार |
| धर्म | हिंदू |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| राशि | उपलब्ध नहीं |
फिजिकल डिटेल्स
| लंबाई | लगभग 5’8” (173 सेमी) |
| वजन | लगभग 87 किलो |
| आंखों का रंग | काला |
| बालों का रंग | काला |
शुरुआती जीवन
रौशन आनंद का जन्म बिहार के सहरसा जिले के धमसेना गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके बचपन में आर्थिक तंगी थी, और परिवार की आजीविका खेती पर निर्भर थी। रौशन ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की, जहां उनके टीचर्स सख्त लेकिन समर्पित थे। उन्होंने 10वीं, 11वीं, और 12वीं की पढ़ाई पूरी की और मगध यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। कम उम्र से ही रौशन स्वतंत्र निर्णय लेते थे, जैसे कि 9वीं कक्षा छोड़कर सीधे 10वीं का सिलेबस पढ़ना, जिसके कारण उनके पिता से मतभेद भी हुए। उनकी मां का सपना था कि वो इंजीनियर बनें, जिसने रौशन को इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए प्रेरित किया।

शिक्षा
| स्कूल | सरकारी स्कूल, सहरसा, बिहार |
| कॉलेज/विश्वविद्यालय | मगध यूनिवर्सिटी, बिहार |
| योग्यता | ग्रेजुएशन |
रौशन आनंद के बारे में खास बातें
- 15 साल की उम्र में घर छोड़कर पटना आए और इंजीनियरिंग की तैयारी शुरू की।
- स्वामी विवेकानंद से प्रेरित हैं और समाज सेवा को जीवन का लक्ष्य मानते हैं।
- अपनी साधारण भाषा और रिलेटेबल टीचिंग स्टाइल के लिए स्टूडेंट्स में पॉपुलर हैं।
- कोविड-19 के दौरान गंगा घाट पर टेस्ट सीरीज चलाई, जो पटना में अनोखी पहल थी।
- बिहार पुलिस भर्ती में 300+ स्टूडेंट्स की सिलेक्शन के बाद उनकी अकादमी को “दरोगा फैक्ट्री” कहा जाने लगा।
- 2014 से 2022 तक परिवार से दूर रहे, लेकिन 2022 में पर्सनल कारणों से फिर जुड़े।
- बिहार की एग्जाम सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी की कमी पर खुलकर बोलते हैं।
उपलब्धियां और पुरस्कार
- ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी: बिहार पुलिस SI भर्ती में उल्लेखनीय रिजल्ट्स, जैसे 2018 में 1717 पदों में 8 सिलेक्शन, और 1275 पदों में 300+ सिलेक्शन।
- सोशल इम्पैक्ट: हजारों स्टूडेंट्स, खासकर ग्रामीण बिहार के युवाओं को सरकारी नौकरियों में सफलता दिलाई।
- मोटिवेशनल स्पीकर: बिहार के युवाओं के बीच प्रेरणादायक स्पीच के लिए पहचाने जाते हैं।
- कोविड इनोवेशन: लॉकडाउन में ऑनलाइन टीचिंग और हॉस्टल सेटअप के जरिए 45 स्टूडेंट्स को SI बनवाया।
करियर हाइलाइट्स
रौशन ने अपने करियर की शुरुआत इंजीनियरिंग की तैयारी से की। 2009 में वो पटना आए और फिर 2011-12 में कोटा गए, जहां से उन्होंने AIEEE में अच्छा रैंक हासिल किया और BIT मेसरा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया। लेकिन आर्थिक दिक्कतों और प्लेसमेंट की अनिश्चितता के कारण 2013 में वो ड्रॉपआउट कर गए। इसके बाद उन्होंने बिहार पुलिस, UPSC, और BPSC जैसे कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी शुरू की। 2014 में बिहार पुलिस की लिखित परीक्षा पास की, लेकिन फिजिकल टेस्ट में फेल हो गए। BPSC में 60वीं-62वीं भर्ती के इंटरव्यू तक पहुंचे, पर फाइनल मेरिट में नहीं आए।
इन असफलताओं के बाद रौशन ने 2014 में अपने लॉज में स्टूडेंट्स को पढ़ाना शुरू किया, जहां वो पढ़ाई के बदले खाना लेते थे। इस अनुभव ने उन्हें टीचिंग का पोटेंशियल दिखाया। 1 सितंबर 2017 को उन्होंने ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी की शुरुआत की, जो आज बिहार की टॉप कोचिंग इंस्टिट्यूट्स में से एक है। उनकी अकादमी इतिहास, राजनीति, और भूगोल जैसे सब्जेक्ट्स में बेस्ट टीचिंग के लिए जानी जाती है।

करियर की शुरुआत
| पहला कदम | 2014 में लॉज में स्टूडेंट्स को ट्यूशन |
| कोचिंग डेब्यू | ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी (1 सितंबर 2017) |
| पहला बड़ा रिजल्ट | 2018 में बिहार SI में 8 सिलेक्शन |
नेट वर्थ और इनकम
| अनुमानित नेट वर्थ | 1-2 करोड़ रुपये (2025 तक, अनुमानित) |
| वार्षिक आय | कोचिंग, यूट्यूब, और मोटिवेशनल इवेंट्स से |
| इनकम सोर्स | कोचिंग इंस्टिट्यूट, ऑनलाइन क्लासेस, सोशल मीडिया |
सामाजिक योगदान
रौशन बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। वो खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर स्टूडेंट्स को सपोर्ट करते हैं। उनकी अकादमी में कई स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप दी जाती है। वो बिहार में महिलाओं की शिक्षा पर जोर देते हैं। इसके अलावा, वो भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता फैलाते हैं और स्टूडेंट्स को इंटीग्रिटी के साथ काम करने की सलाह देते हैं।
लाइफस्टाइल और फेवरेट्स
| फेवरेट खाना | साधारण बिहारी खाना |
| फेवरेट इंस्पिरेशन | स्वामी विवेकानंद |
| कार कलेक्शन | XUV, स्कॉर्पियो N |
रौशन से सोशल मीडिया पर जुड़ें
- YouTube: Gyan Bindu GS Academy
- Instagram: instagram.com/gyan_bindu_gs_academy_patna/
लेखक की ओर से
रौशन आनंद का मानना है कि शिक्षा का मकसद सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि जीवन में हर फील्ड में एक्सीलेंस हासिल करना है। वो स्टूडेंट्स को स्टार्टअप्स, क्रिएटिव प्रोफेशन्स, और अन्य करियर्स एक्सप्लोर करने की सलाह देते हैं। उनकी जिंदगी की कहानी मेहनत, सैक्रिफाइस, और रिस्क लेने की मिसाल है। वो कहते हैं, “असफलता सफलता का पिलर है,” और बिहार के यूथ को अपने टैलेंट को पहचानने के लिए प्रेरित करते हैं।
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