Prashant Kishor Biography: प्रशांत किशोर, जिन्हें लोग प्यार से पीके के नाम से जानते हैं, भारत के मशहूर राजनीतिक रणनीतिकार और अब राजनेता हैं। उन्होंने चाय पर चर्चा, 3D रैलियां, और सोशल मीडिया कैंपेन जैसे इनोवेटिव आइडियाज से भारतीय राजनीति में तहलका मचाया। बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, और ममता बनर्जी जैसे बड़े नेताओं को सत्ता तक पहुंचाने में उनकी रणनीतियों ने कमाल किया। अब वो अपनी पार्टी जन सुराज के साथ बिहार की सियासत में नया बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका सफर प्रेरणादायक है, जो मेहनत और दिमागी खेल का शानदार मिश्रण है।
प्रशांत किशोर का बायोडाटा
| विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | प्रशांत किशोर पांडेय |
| जन्म तिथि | 20 मार्च 1977 |
| उम्र | 48 साल (2025 तक) |
| पेशा | राजनीतिक रणनीतिकार, राजनेता, जन सुराज पार्टी के संस्थापक |
| गृहनगर | कोनार गांव, सासाराम, रोहतास, बिहार |
| वर्तमान निवास | पटना, बिहार |
| धर्म | हिंदू |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| Instagram ID | https://instagram.com/prashant_kishor |
| हाइट | 5 फीट 10 इंच (178 सेमी) |
| वजन | लगभग 75 किलो |
| आँखों का रंग | काला |
| बालों का रंग | काला (कुछ सफेद) |
प्रशांत किशोर का शुरुआती जीवन
प्रशांत किशोर का जन्म 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ। उनका परिवार मध्यमवर्गीय था, और उनके पिता श्रीकांत पांडेय एक डॉक्टर थे, जो बक्सर और शाहपुर में प्रैक्टिस करते थे। उनकी मां सुशीला पांडेय एक गृहिणी थीं, जो बेटे की हर बात को सपोर्ट करती थीं, लेकिन राजनीति से उन्हें सख्त नफरत थी। परिवार बाद में बक्सर शिफ्ट हो गया, जहां प्रशांत ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की।
बचपन में प्रशांत पढ़ाई में औसत थे। वो कई बार पढ़ाई छोड़कर बैठ जाते थे, जिससे उनके पिता चिंतित रहते थे। फिर भी, उन्होंने बक्सर के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और बाद में हैदराबाद से इंजीनियरिंग और पब्लिक हेल्थ में पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा किया। उनकी टेक और हेल्थ में रुचि ने उन्हें संयुक्त राष्ट्र (UN) की नौकरी तक पहुंचाया, जहां उन्होंने 8 साल तक काम किया। उनकी पहली पोस्टिंग आंध्र प्रदेश में हुई, फिर पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के लिए बिहार भेजा गया। इस दौरान उन्होंने अफ्रीका के चाड में भी काम किया, जहां उन्होंने कुपोषण पर रिसर्च पेपर लिखा, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।
प्रशांत किशोर का परिवार
प्रशांत किशोर का परिवार छोटा और पढ़ा-लिखा है। उनके पिता श्रीकांत पांडेय एक कांग्रेसी समर्थक थे, जबकि मां सुशीला पांडेय ने हमेशा बेटे की मेहनत को सराहा। उनके बड़े भाई अजय किशोर दिल्ली में बिजनेस करते हैं। उनकी दो बहनें हैं, जिनमें से एक दिल्ली में रहती है और उनके पति सेना में हैं।
प्रशांत की पत्नी जाह्नवी दास, असम की रहने वाली हैं और पेशे से डॉक्टर हैं। दोनों की मुलाकात UN के एक हेल्थ प्रोग्राम में हुई, जो दोस्ती और फिर प्यार में बदली। उनकी शादी बंगाली और बिहारी रीति-रिवाजों से हुई, और उनका एक बेटा है। जाह्नवी अब डॉक्टरी छोड़कर बिहार में प्रशांत और बेटे के साथ रहती हैं। परिवार का सपोर्ट प्रशांत की सियासी जंग में उनकी ताकत है।

करियर
प्रशांत किशोर ने अपने करियर की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र में पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के तौर पर की। 2011 में उनकी जिंदगी तब बदली, जब उनके कुपोषण पर लिखे रिसर्च पेपर ने नरेंद्र मोदी का ध्यान खींचा। तब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने प्रशांत को अपने लिए काम करने का मौका दिया। यहीं से प्रशांत का राजनीतिक रणनीतिकार बनने का सफर शुरू हुआ।
2012 में, उन्होंने नरेंद्र मोदी को गुजरात विधानसभा चुनाव में तीसरी बार जीत दिलाने में मदद की। इसके बाद, 2013 में उन्होंने सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) बनाया, जिसने 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। चाय पर चर्चा, 3D रैलियां, और रन फॉर यूनिटी जैसे उनके कैंपेन ने राजनीति में नया ट्रेंड सेट किया। बाद में CAG को I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) में बदला गया।
प्रशांत ने कई पार्टियों के साथ काम किया, जिनमें नीतीश कुमार (2015 बिहार चुनाव), कैप्टन अमरिंदर सिंह (2017 पंजाब चुनाव), जगन मोहन रेड्डी (2019 आंध्र प्रदेश चुनाव), आम आदमी पार्टी (2020 दिल्ली चुनाव), और ममता बनर्जी (2021 पश्चिम बंगाल चुनाव) शामिल हैं। हर बार उनकी रणनीतियों ने जीत दिलाई, सिवाय 2017 उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस के लिए, जहां वो असफल रहे।
2022 में, प्रशांत ने जन सुराज नाम की पार्टी बनाई और अब वो 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें 40 सीटों पर महिला उम्मीदवार होंगी। हाल ही में, वो बीपीएससी अभ्यर्थियों के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठे, जिसने उन्हें फिर चर्चा में ला दिया।

करियर उपलब्धियाँ
| उपलब्धि | विवरण |
| पहला बड़ा कैंपेन | 2012 गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को जीत दिलाई |
| CAG की स्थापना | 2013 में सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस बनाया |
| 2014 लोकसभा चुनाव | बीजेपी को पूर्ण बहुमत, चाय पर चर्चा और 3D रैलियां |
| 2015 बिहार चुनाव | नीतीश कुमार के महागठबंधन को जीत दिलाई |
| 2017 पंजाब चुनाव | कैप्टन अमरिंदर सिंह को जीत, “कॉफी विद कैप्टन” कैंपेन |
| 2021 पश्चिम बंगाल चुनाव | ममता बनर्जी की TMC को शानदार जीत |
| जन सुराज की शुरुआत | 2022 में अपनी पार्टी लॉन्च, 2025 में बिहार में सभी सीटों पर लड़ेगी |
प्रशांत किशोर की नेट वर्थ और आय
| विवरण | जानकारी |
| अनुमानित नेट वर्थ | 20-25 करोड़ रुपये (2025 तक, अनुमानित) |
| सालाना आय | 2-5 करोड़ रुपये (कैंपेन और कंसल्टिंग से) |
| आय के स्रोत | राजनीतिक कैंपेन, I-PAC कंसल्टिंग, जन सुराज के लिए चंदा (चेक से) |
प्रशांत किशोर की कमाई मुख्य रूप से I-PAC की कंसल्टिंग और राजनीतिक कैंपेन से होती है। वो जन सुराज के लिए केवल चेक से चंदा लेते हैं, जिससे उनकी पारदर्शिता की छवि मजबूत होती है। उनके पास पटना में एक आलीशान घर और कई गाड़ियां हैं, लेकिन वो अपनी निजी जिंदगी को सादा रखते हैं।
विवाद
- 2017 उत्तर प्रदेश चुनाव में हार: कांग्रेस के लिए बनाई रणनीति फेल रही, जिसके बाद उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे। हालांकि, उन्होंने बाद में कई जीतों से इसे गलत साबित किया।
- नीतीश कुमार से विवाद: 2015 में नीतीश कुमार को जीत दिलाने के बाद JDU में शामिल हुए, लेकिन CAA-NRC के मुद्दे पर मतभेद के कारण 2020 में पार्टी से निकाले गए।
- बीपीएससी आंदोलन (2025): पटना के गांधी मैदान में बीपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर अनशन के दौरान पटना पुलिस ने उन पर कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया, जिससे उनके गांव में नाराजगी फैली।
- महंगे वैनिटी वैन का विवाद: अनशन के दौरान वैनिटी वैन के इस्तेमाल पर सवाल उठे, जिसे उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से जायज ठहराया।
प्रशांत किशोर का सफर मेहनत, दिमाग, और जुनून की मिसाल है। वो न सिर्फ एक रणनीतिकार हैं, बल्कि अब बिहार की सियासत में बदलाव की उम्मीद बन चुके हैं। उनकी कहानी हर उस शख्स को प्रेरित करती है, जो छोटे से शुरू करके बड़ा करना चाहता है।
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