Gukesh Dommaraju Biography In Hindi – गुकेश डोमराजू एक बेहद टैलेंटेड शतरंज खिलाड़ी हैं। उनका जन्म 29 मई 2006 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ था। उनके पापा रजनीकांत ईएनटी सर्जन हैं और मम्मी पद्माकुमारी माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं। गुकेश ने सिर्फ सात साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया था और बहुत जल्दी अपनी जबरदस्त प्रतिभा से सबको चौंका दिया।
गुकेश डोमराजू का बायोडेटा (Gukesh Dommaraju Biodata)
| नाम | डी. गुकेश डोमराजू |
| जन्म तारीख | 29 मई 2006 |
| जन्म स्थान | चेन्नई, तमिलनाडु, भारत |
| परिवार | तेलुगू परिवार |
| मूल गाँव | चेंचुराजू कंड्रिगा, आंध्र प्रदेश |
| शतरंज में शुरुआत | 7 साल की उम्र में |
| प्रमुख उपलब्धियाँ | सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर, विश्व शतरंज चैंपियनशिप विजेता |
| महत्वपूर्ण जीत | एशियाई स्कूल चैंपियनशिप, अंडर-12 विश्व युवा चैंपियनशिप, टाटा स्टील टाई ब्रेक में जीत |
| वर्तमान स्थिति | विश्व के टॉप शतरंज खिलाड़ियों में से एक |
गुकेश डोमराजू सोशल मीडिया (Gukesh Dommaraju Social Media)
| gukesh.official |
गुकेश डोमराजू का प्रारंभिक जीवन (Gukesh Dommaraju Early Life)
गुकेश डोमराजू ने सिर्फ सात साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। शुरू-शुरू में वो हफ्ते में तीन क्लास लेते थे, जिससे उनकी बुनियाद मजबूत हो गई। जल्दी ही उनके कोचों को उनकी टैलेंट समझ आ गई और उन्होंने गुकेश को वीकेंड में होने वाले छोटे-छोटे टूर्नामेंट्स में खेलने के लिए कहा। बस, एक साल के अंदर ही गुकेश ने रेटिंग वाले बड़े टूर्नामेंट खेलना शुरू कर दिया — जो उनकी खास काबिलियत को दिखाता है।
गुकेश के मम्मी-पापा दोनों डॉक्टर हैं, फिर भी उन्होंने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए पूरा साथ दिया। उनकी मम्मी, जो माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने एक्स्ट्रा काम करना शुरू कर दिया और पापा, जो ENT सर्जन हैं, उन्होंने अपनी नौकरी पार्ट-टाइम कर दी, ताकि वो गुकेश के साथ टूर्नामेंट्स में जा सकें।
इस तरह, गुकेश का शुरुआती सफर मेहनत, परिवार के प्यार और अच्छे गाइडेंस की वजह से आगे बढ़ा, और यही सब उन्हें एक इंटरनेशनल शतरंज चैम्पियन बनने की ओर ले गया।

गुकेश डोमराजू का परिवार
डी. गुकेश का जन्म 29 मई 2006 को चेन्नई में एक तेलुगू परिवार में हुआ था। उनका मूल गाँव आंध्र प्रदेश के चेंचुराजू कंड्रिगा में है, लेकिन उनका परिवार चेन्नई में ही रहता है। उनके घर में मम्मी–डॉ. पद्माकुमारी, जो माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं, और पापा–डॉ. रजनीकांत, जो एक ईएनटी सर्जन हैं, शामिल हैं।
गुकेश डोमराजू का शिक्षा और शतरंज पर फोकस
गुकेश ने चेन्नई के वेलाम्मल विधालय में पढ़ाई की, जहाँ स्कूल प्रशासन ने उनकी प्रतिभा को समझते हुए उन्हें विशेष छूट दी। उन्हें रोजाना कक्षाओं में भाग लेने की बजाय सिर्फ परीक्षाएं देने की अनुमति मिली, ताकि वह अपना पूरा ध्यान शतरंज पर केंद्रित कर सकें।
गुकेश डोमराजू शतरंज कैरियर: युवा चैंपियन से ग्रैंडमास्टर
2015 में एक नौजवान भारतीय लड़के ने शतरंज की दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू की। ये लड़का था गुकेश, जिसने एशियन स्कूल शतरंज चैंपियनशिप के अंडर-9 कैटेगरी में जीत हासिल की। यहीं से उनके शानदार करियर की शुरुआत हुई।
2018 तक आते-आते, गुकेश ने अंडर-12 वर्ल्ड यूथ शतरंज चैंपियनशिप जीत ली, जिससे पूरी दुनिया का ध्यान उनकी तरफ गया। उसी साल उन्होंने एशियन यूथ शतरंज चैंपियनशिप में भी कमाल कर दिया — 5 गोल्ड मेडल जीते! इसमें अंडर-12 के रैपिड, ब्लिट्ज और क्लासिकल गेम शामिल थे, साथ ही टीम इवेंट में भी रैपिड और ब्लिट्ज में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।
2017 में, जब वो सिर्फ 11 साल के थे, उन्होंने कैपेले-ला-ग्रांडे ओपन में खेलते हुए इंटरनेशनल मास्टर (IM) का खिताब हासिल कर लिया। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 15 जनवरी 2019 को आई, जब वो 12 साल, 7 महीने और 17 दिन की उम्र में ग्रैंडमास्टर (GM) बन गए। वो दुनिया के दूसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने। हालांकि, कुछ समय बाद अभिमन्यु मिश्रा ने ये रिकॉर्ड तोड़ दिया, लेकिन गुकेश की ये उपलब्धि आज भी भारतीय शतरंज के लिए बहुत बड़ी मानी जाती है।
2021 में भी गुकेश ने अपना जलवा बरकरार रखा। उन्होंने जूलियस बेयर चैलेंजर्स शतरंज टूर के गेलफैंड चैलेंज में खेलते हुए 19 में से 14 अंक हासिल किए और टूर्नामेंट जीत लिया। ये जीत उनकी मेहनत, समझदारी और जीतने की जिद को दिखाती है।

गुकेश डोमराजू ओलंपियाड गोल्ड, 2700 रेटिंग, और कार्लसन विजय
अगस्त 2022 में 44वें शतरंज ओलंपियाड का मंच पर गुकेश का जौहर देखने को मिला। उन्होंने शुरुआती 8 मैचों में 8/8 का धमाकेदार स्कोर बनाया और आठवें दौर में अमेरिका के ताकतवर ग्रैंडमास्टर फैबियानो कारूआना को शिकस्त दी। 11 में से 9 अंक हासिल करके उन्होंने पहले बोर्ड पर गोल्ड मेडल अपने नाम किया, हालांकि उनकी टीम इंडिया-2 को टूर्नामेंट में कांस्य पदक (तीसरा स्थान) मिला।
सितंबर 2022 में गुकेश ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की-FIDE रेटिंग में 2700 का जादूई आँकडा़ पार कर 2726 तक पहुँचे। इसके साथ ही वे वेई यी और फिरोजा अलीरेजा के बाद दुनिया के तीसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए, जिन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
लेकिन गुकेश का जलवा यहीं नहीं रुका, अक्टूबर 2022 में ऐमचेस रैपिड टूर्नामेंट में उन्होंने मैग्नस कार्लसन (तब के विश्व चैम्पियन) को हराकर इतिहास रच दिया। यह जीत उन्हें कार्लसन को हराने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के रूप में रेकॉर्ड बुक्स में दर्ज करा गई।
इस तरह, मात्र 16 साल की उम्र में गुकेश ने शतरंज की दुनिया में तूफान ला दिया- ओलंपियाड गोल्ड, 2700+ रेटिंग और कार्लसन जैसे दिग्गज को मात देकर उन्होंने साबित कर दिया कि भारत का यह युवा सितारा अब विश्व शतरंज के शीर्ष पर छाने को तैयार हैं!
गुकेश का शानदार ऐतिहासिक जीत
अगस्त 2022 में 17 वर्षीय गुकेश ने 2750 FIDE रेटिंग हासिल करके एक नया इतिहास रच दिया। वे यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के शतरंज खिलाड़ी बन गए।
उन्होंने शतरंज विश्व कप 2023 में शानदार प्रदर्शन किया, जहाँ उन्होंने मिसरतदीन इस्कंदरोव, एस• एल• नारायण, एंड्री एसिपेंको और वांग हाओ जैसे मजबूत प्रतिद्वंदियों को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, उनका सफर वहाँ खत्म हो गया, क्योंकि विश्व नंबर 1 शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने उन्हें रोक दिया।
सितंबर 2023 में गुकेश ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। वे विश्वनाथन आनंद को पीछे छोड़ते हुए भारत के नंबर 1 शतरंज खिलाड़ी बन गए। यह 37 साल बाद पहली बार हुआ जब आनंद टॉप स्थान पर नहीं थे।
दिसंबर 2023 में, FIDE सर्किट के अंत में, मुकेश ने 2024 कैंडीडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया। वे सर्किट में दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन चूंकि विजेता फैबियानो कारूआना पहले ही क्वालीफाई कर चुके थे, इसलिए गुकेश को टिकट मिल गया। इसके साथ ही, वे बॉबी फिशर और कार्लसन के बाद कैंडीडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करने वाले इतिहास के तीसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए।

गुकेश डोमराजू की जीत और शीर्ष रैंकिंग
जनवरी 2024 में, भारत के होनहार शतरंज खिलाड़ी गुकेश ने टाटा स्टील शतरंज टूर्नामेंट में कमाल का खेल दिखाया। उन्होंने 13 में से 8.5 अंक बनाए और मुकाबला चार खिलाड़ियों के बीच टाई पर पहुंच गया। टाईब्रेक राउंड में गुकेश ने ग्रैंडमास्टर अनीश गिरी को हरा दिया। हालांकि फाइनल में उन्हें वेई यी से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा।
कैंडीडेट्स टूर्नामेंट में ऐतिहासिक जीत, अप्रैल 2024 में गुकेश ने 2024 कैंडीडेट्स टूर्नामेंट में 9/14 अंकों के साथ शानदार जीत दर्ज़ की। इसी दौरान उन्होंने आर• प्रग्गनानंदा, विदित गुजराती, अलीरेजा फिरोजा और निजात अबासोव जैसे दिग्गज खिलाड़ीयों को पछाड़ा दिया। इस जीत के साथ, वह विश्व शतरंज चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए।
शतरंज ओलंपियाड में स्वर्णिम सफलता, सितंबर 2024 में मुकेश ने बुडापेस्ट शतरंज ओलंपियाड में भारत की टीम को पहला स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने बोर्ड पर 9/10 अंक हासिल किए और एक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक भी जीता।
FIDE विश्व रैंकिंग में शीर्ष 5 में पहुंचे, 1 अक्टूबर 2024 को गुकेश ने FIDE विश्व रैंकिंग में पहली बार शीर्ष 5 में प्रवेश किया, जिससे उन्होंने शतरंज की दुनिया में अपनी धाक जमा दी
गुकेश डोमराजू बने इतिहास के सबसे कम उम्र के निर्विवाद
12 दिसंबर, 2024 को एक ऐतिहासिक पल आया जब 18 वर्षीय भारतीय शतरंज प्रतिभा डी• मुकेश ने चीन के डिंग लिरेन को अंतिम गेम में हराकर 7.5-6.5 के स्कोर से विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीत ली। इस जीत के साथ ही वे दुनिया के 18वें निर्विवाद विश्व शतरंज चैंपियन बन गए और साथ ही सबसे कम उम्र में यह खिताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी भी बनें।
गुकेश की शतरंज में जबरदस्त प्रतिभा है। उन्होंने एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया है, जो पहले यूक्रेन के रुस्लान पोनोमारियोव के नाम था। पोनोमारियोव ने 2002 में 18 साल की उम्र में नो-आउट फॉर्मेट में वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीती थी। लेकिन गुकेश ने इसे भी पीछे छोड़ दिया और क्लासिकल मैच फॉर्मेट में ये बड़ा खिताब जीता, जो शतरंज की दुनिया में सबसे कठिन और सम्मानित माना जाता है।
यानी गुकेश ने सबसे मुश्किल तरीके से ये कामयाबी हासिल की, जो उनकी खासियत और मेहनत दिखाता है।




