Draupadi Murmu Biography In Hindi-द्रौपदी मुर्मू जी का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज ज़िले के उपरबेड़ा गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। वो 2022 में भारत की राष्ट्रपति बनीं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति का चुनाव जीता। वो भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। साथ ही, वो सबसे कम उम्र (64 साल) में राष्ट्रपति बनने वाली महिला और आज़ाद भारत में जन्मी पहली राष्ट्रपति हैं
द्रौपति मुर्मू का बायोडाटा (Draupadi Murmu Ka Biodata)
| पूरा नाम (Name) | द्रौपदी मुर्मू |
| आय (Income) | 5 लाख/माह |
| उम्र (Age) | 67 बर्ष (2025) |
| पेशा (Profession) | राजनीतिज्ञ, अध्यापक |
| पति का नाम (Husband Name) | श्याम चरण मुर्मू |
| ऊंचाई (Hight) | 5 फीट 2 इंच |
| वजन (Weight) | 65 KG |
| Eyes Color (आँखों का रंग) | काला |
| Hair Color (बालों का रंग) | काला |
| शौक (Hobbies) | राजनीतिज्ञ, अध्यापक |
| सम्मान (Award) | नीलकंठ पुरुस्कार (2007) |
| होमटाउन (Hometown) | उपरबेडा़ मयूरभंज, ओडिशा |
| निवास स्थान (Resident Place) | राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली |
| शिक्षा (Schooling) | उपरबेडा़ के स्थानीय प्राथमिक विद्यालय (गर्ल हाई स्कूल यूनिटी-2) |
| कॉलेज (College) | रमा देवी महिला विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर (बीए) |
| शिक्षा की डिग्री (Education Degree) | स्नातक |
| राष्ट्रीयता (Nationality) | भारतीय |
| रिश्ते की स्थिति (Relationship status) | शादीशुदा |

द्रौपदी मुर्मू का सोशल मीडिया अकाउंट ( Draupadi Murmu Social media Account)
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द्रौपदी मुर्मू का परिवार (Draupadi Murmu Family)
द्रौपदी मुर्मू का जन्म एक आदिवासी संथाली परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू था, जो एक किसान थे। उनके पिता और दादा दोनों ही अपने गांव की पंचायत (ग्राम परिषद) के पारंपरिक मुखिया रहे थे। साल 1980 में द्रौपदी मुर्मू की शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई, जो एक बैंक में काम करते थे। लेकिन 2014 में उनकी मृत्यु हो गई।
उनके तीन बच्चे थे दो बेटे और एक बेटी, जिसका नाम इतिश्री मुर्मू है। दुख की बात है कि उनके दोनों बेटों की मृत्यु हो चुकी है, एक बेटा सड़क हादसे में और दूसरे की मौत रहस्यमय हालात में हुई।

द्रौपदी मुर्मू कैरियर
द्रौपदी मुर्मू ने अपने करियर की शुरुआत 1979 में ओडिशा सरकार के सिंचाई विभाग में एक जूनियर असिस्टेंट के तौर पर की। वहाँ उन्होंने 1983 तक काम किया। इसके बाद 1994 से 1997 तक उन्होंने रायरंगपुर के श्री अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर स्कूल में एक टीचर के रूप में पढ़ाया। वहाँ वो हिन्दी, ओड़िया, गणित और भूगोल जैसे विषय पढ़ाती थीं। सबसे खास बात ये है कि उन्होंने उस स्कूल में काम करते हुए कभी पूरा वेतन नहीं लिया।
द्रौपदी मुर्मू का राजनीतिक कैरियर (Political Career of Draupadi Murmu)
द्रौपदी मुर्मू ने राजनीति में कदम 1997 में रखा, जब वो रायरंगपुर नगर पंचायत में महिलाओं के लिए आरक्षित सीट से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनी गईं। इसके कुछ समय बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जॉइन की। साल 2000 में उन्होंने ओडिशा विधानसभा चुनाव में रायरंगपुर सीट से जीत दर्ज की और इसके बाद 2000 से 2009 तक लगातार दो बार विधायक रहीं।
भाजपा और बीजद की गठबंधन सरकार के दौरान उन्होंने मंत्री के रूप में भी काम किया। पहले वो 2000 से 2002 तक वाणिज्य और परिवहन विभाग की स्वतंत्र प्रभार मंत्री रहीं, फिर 2002 से 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विभाग की मंत्री बनीं। उनके अच्छे काम के लिए उन्हें 2007 में ओडिशा विधानसभा का सर्वश्रेष्ठ विधायक चुना गया और नीलकंठ पुरस्कार मिला।
हालांकि 2009 में मयूरभंज लोकसभा सीट से चुनाव हार गईं क्योंकि उस समय भाजपा और बीजद का गठबंधन टूट चुका था। इसके बाद भी वो सक्रिय रहीं और 2013 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एसटी मोर्चा) में शामिल हुईं और 2015 तक जिला अध्यक्ष की भूमिका निभाई।

झारखंड के राज्यपाल के रूप में द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल
द्रौपदी मुर्मू ने 18 मई 2015 को झारखंड की राज्यपाल के रूप में शपथ ली। इस पद को संभालने वाली वो झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं। अपने करीब 6 साल के कार्यकाल में उन्होंने राज्य में भारतीय जनता पार्टी की
द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय यात्राएँ
भारत की राष्ट्रपति बनने के बाद, द्रौपदी मुर्मू जी ने देशभर में कई यात्राएं कीं और विदेशों का भी दौरा किया, जिससे भारत के संबंध दूसरे देशों से और मजबूत हो सकें। उन्होंने 2022 में यूनाइटेड किंगडम (UK) का दौरा किया और इसके बाद कई और देशों की राजकीय यात्राएं कीं, जैसे– सूरीनाम, साइबेरिया, मॉरीशस, फिजी, तिमोर-लेस्ते, न्यूज़ीलैंड, मौरिटानिया, अल्जीरिया और मालावी। इन दौरों के दौरान उन्होंने वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की और भारत के रिश्ते उन देशों से मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई।
उनकी विदेश यात्राओं और योगदान के लिए उन्हें कई बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले। जैसे – सूरीनाम ने उन्हें ग्रैंड ऑर्डर ऑफ द चेन ऑफ येलो स्टार, तिमोर-लेस्ते ने “ग्रैंड कॉलर ऑफ द ऑर्डर ऑफ तिमोर-लेस्ते” और फिजी ने “कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी” से सम्मानित किया।
इसके अलावा, उन्हें मॉरीशस यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट ऑफ सिविल लॉ की मानद उपाधि और अल्जीरिया की एक यूनिवर्सिटी से “पॉलिटिकल साइंस में मानद डॉक्टरेट” की उपाधि भी दी गई।




